Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.46.33-35: सिंहराज! सात्यकि के ये वचन सुनकर दारुक ने उस उत्तम रथ को जोत लिया, जो मरकत, चंद्रमणि और सूर्यमणि रत्नों की प्रकाशमय तरंगों से विभूषित था; जिसका प्रत्येक भाग सुवर्णमय आभूषणों से सुशोभित था और जिसके पहिये सुवर्णपत्र से जड़े हुए थे; और हाथ जोड़कर भगवान श्रीकृष्ण को इसकी सूचना दी। सूर्य की किरणों से प्रकाशित वह वेगशाली रथ, नव उदय हुए सूर्य के समान चमक रहा था; उसके भीतरी भाग नाना प्रकार के विचित्र रत्नों से सुशोभित थे। वह भव्य रथ गरुड़ से अंकित विचित्र ध्वजाओं और पताकाओं से सुशोभित था। सुग्रीव और शैब्य जैसे सुंदर घोड़े, जिनके शरीर सुवर्णमय आभूषणों से सुशोभित थे, उसमें जुते हुए थे। | mahabharat अध्याय 12.46: युधिष्ठिर और श्रीकृष्णका संवाद, श्रीकृष्णद्वारा भीष्मकी प्रशंसा और युधिष्ठिरको उनके पास चलनेका आदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सिंहराज! सात्यकि के ये वचन सुनकर दारुक ने उस उत्तम रथ को जोत लिया, जो मरकत, चंद्रमणि और सूर्यमणि रत्नों की प्रकाशमय तरंगों से विभूषित था; जिसका प्रत्येक भाग सुवर्णमय आभूषणों से सुशोभित था और जिसके पहिये सुवर्णपत्र से जड़े हुए थे; और हाथ जोड़कर भगवान श्रीकृष्ण को इसकी सूचना दी। सूर्य की किरणों से प्रकाशित वह वेगशाली रथ, नव उदय हुए सूर्य के समान चमक रहा था; उसके भीतरी भाग नाना प्रकार के विचित्र रत्नों से सुशोभित थे। वह भव्य रथ गरुड़ से अंकित विचित्र ध्वजाओं और पताकाओं से सुशोभित था। सुग्रीव और शैब्य जैसे सुंदर घोड़े, जिनके शरीर सुवर्णमय आभूषणों से सुशोभित थे, उसमें जुते हुए थे।
King lion! On hearing these words of Satyaki, Daruk yoked that excellent chariot decorated with the luminous waves of emerald, moonstone and sunstone gems, each and every part of which was adorned with golden ornaments and the wheels were studded with gold leaf, and with folded hands informed Lord Krishna about it. That swift chariot, illuminated by the rays of the sun, shone like the newly risen sun, its inner parts were decorated with various kinds of strange gems. That majestic chariot was decorated with strange flags and banners marked with Garuda. Beautiful horses like Sugreeva and Shaibya, with their bodies decorated with golden ornaments, as fast as a bead, were harnessed to it.
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि महापुरुषस्तवे षट्चत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें महापुरुषस्तुतिविषयक छियालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥