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mahabharat 12.46.32: आज्ञा पाते ही सात्यकि तुरन्त श्रीकृष्ण के पास से निकलकर दारुक से बोले - 'भगवान श्रीकृष्ण का रथ तैयार करो' ॥32॥   |   mahabharat अध्याय 12.46: युधिष्ठिर और श्रीकृष्णका संवाद, श्रीकृष्णद्वारा भीष्मकी प्रशंसा और युधिष्ठिरको उनके पास चलनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.46.32 
सात्यकिस्त्वाशु निष्क्रम्य केशवस्य समीपत:।
दारुकं प्राह कृष्णस्य युज्यतां रथ इत्युत॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
आज्ञा पाते ही सात्यकि तुरन्त श्रीकृष्ण के पास से निकलकर दारुक से बोले - 'भगवान श्रीकृष्ण का रथ तैयार करो' ॥32॥
 
As soon as he received the permission, Satyaki immediately came out from Shri Krishna and said to Daruka - 'Prepare the chariot of Lord Shri Krishna'. 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)