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mahabharat 12.46.3: आपके शरीर में निवास करने वाली तथा श्वास-प्रश्वास आदि पाँच क्रियाएँ करने वाली प्राणवायु अवरुद्ध हो गई है। आपने अपनी सुखी इन्द्रियों को अपने मन में स्थापित कर लिया है। 3॥   |   mahabharat अध्याय 12.46: युधिष्ठिर और श्रीकृष्णका संवाद, श्रीकृष्णद्वारा भीष्मकी प्रशंसा और युधिष्ठिरको उनके पास चलनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 46: युधिष्ठिर और श्रीकृष्णका संवाद, श्रीकृष्णद्वारा भीष्मकी प्रशंसा और युधिष्ठिरको उनके पास चलनेका आदेश  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.46.3 
निगृहीतो हि वायुस्ते पञ्चकर्मा शरीरग:।
इन्द्रियाणि प्रसन्नानि मनसि स्थापितानि ते॥ ३॥
 
 
अनुवाद
आपके शरीर में निवास करने वाली तथा श्वास-प्रश्वास आदि पाँच क्रियाएँ करने वाली प्राणवायु अवरुद्ध हो गई है। आपने अपनी सुखी इन्द्रियों को अपने मन में स्थापित कर लिया है। 3॥
 
The vital air that resides in your body and performs the five functions like breathing and exhalation has been blocked. You have established your happy senses in your mind. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)