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mahabharat 12.46.22: पृथ्वीनाथ! उनसे इन चार विद्याओं - धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, होता, उद्गाता, ब्रह्म और अध्वर्यु से संबंधित यज्ञ अनुष्ठान, चारों आश्रमों के धर्म और संपूर्ण राजधर्म के बारे में पूछें। 22॥   |   mahabharat अध्याय 12.46: युधिष्ठिर और श्रीकृष्णका संवाद, श्रीकृष्णद्वारा भीष्मकी प्रशंसा और युधिष्ठिरको उनके पास चलनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.46.22 
चातुर्विद्यं चातुर्होत्रं चातुराश्रम्यमेव च।
राजधर्मांश्च निखिलान् पृच्छैनं पृथिवीपते॥ २२॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वीनाथ! उनसे इन चार विद्याओं - धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, होता, उद्गाता, ब्रह्म और अध्वर्यु से संबंधित यज्ञ अनुष्ठान, चारों आश्रमों के धर्म और संपूर्ण राजधर्म के बारे में पूछें। 22॥
 
Prithvinath! Ask him about these four Vidyas – Dharma, Artha, Kama and Moksha, the yagya rituals related to Hota, Udgata, Brahma and Adhvaryu, the religions of the four ashrams and the entire royal religion. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)