Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.46.18: हे पाण्डुपुत्र! मैं मन ही मन उन भीष्म का चिन्तन कर रहा था जो जमदग्निपुत्र परशुराम के प्रिय शिष्य और समस्त विद्याओं के आधार हैं॥18॥   |   mahabharat अध्याय 12.46: युधिष्ठिर और श्रीकृष्णका संवाद, श्रीकृष्णद्वारा भीष्मकी प्रशंसा और युधिष्ठिरको उनके पास चलनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 46: युधिष्ठिर और श्रीकृष्णका संवाद, श्रीकृष्णद्वारा भीष्मकी प्रशंसा और युधिष्ठिरको उनके पास चलनेका आदेश  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.46.18 
रामस्य दयितं शिष्यं जामदग्न्यस्य पाण्डव।
आधारं सर्वविद्यानां तमस्मि मनसा गत:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे पाण्डुपुत्र! मैं मन ही मन उन भीष्म का चिन्तन कर रहा था जो जमदग्निपुत्र परशुराम के प्रिय शिष्य और समस्त विद्याओं के आधार हैं॥18॥
 
O son of Pandu! I was thinking in my mind of that Bhishma who is the favourite disciple of Jamadagni's son Parashurama and the basis of all knowledge. ॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)