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mahabharat 12.46.15: वे भीष्मजी अपनी सम्पूर्ण इन्द्रियों को एकाग्र करके तथा बुद्धि के द्वारा मन को वश में करके मेरी शरण में आये थे, इसलिए मेरा मन भी उनमें लीन हो गया।   |   mahabharat अध्याय 12.46: युधिष्ठिर और श्रीकृष्णका संवाद, श्रीकृष्णद्वारा भीष्मकी प्रशंसा और युधिष्ठिरको उनके पास चलनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.46.15 
एकीकृत्येन्द्रियग्रामं मन: संयम्य मेधया।
शरणं मामुपागच्छत् ततो मे तद्‍गतं मन:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वे भीष्मजी अपनी सम्पूर्ण इन्द्रियों को एकाग्र करके तथा बुद्धि के द्वारा मन को वश में करके मेरी शरण में आये थे, इसलिए मेरा मन भी उनमें लीन हो गया।
 
That Bhishmaji had come to my refuge by concentrating all his senses and controlling his mind with the help of his intellect; that is why my mind too got absorbed in him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)