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mahabharat 12.46.11: श्रीकृष्ण बोले - राजन! बाणों की शय्या पर लेटे हुए सिंहपुरुष भीष्म, जो इस समय बुझती हुई अग्नि के समान हैं, मेरा ध्यान कर रहे हैं; इसलिए मेरा मन भी उन्हीं में लगा हुआ है॥11॥   |   mahabharat अध्याय 12.46: युधिष्ठिर और श्रीकृष्णका संवाद, श्रीकृष्णद्वारा भीष्मकी प्रशंसा और युधिष्ठिरको उनके पास चलनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.46.11 
वासुदेव उवाच
शरतल्पगतो भीष्म: शाम्यन्निव हुताशन:।
मां ध्याति पुरुषव्याघ्रस्ततो मे तद्‍गतं मन:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण बोले - राजन! बाणों की शय्या पर लेटे हुए सिंहपुरुष भीष्म, जो इस समय बुझती हुई अग्नि के समान हैं, मेरा ध्यान कर रहे हैं; इसलिए मेरा मन भी उन्हीं में लगा हुआ है॥11॥
 
Shri Krishna said - King! The lion-man Bhishma, lying on the bed of arrows, who is like a dying fire at this moment, is meditating on me; therefore my mind is also focused on him. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)