Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.46.1-2: युधिष्ठिर ने पूछा, "हे परम पराक्रमी एवं जगत के रक्षक पुरुषोत्तम! आप किसका ध्यान कर रहे हैं? यह बड़े आश्चर्य की बात है! क्या तीनों लोकों में सब कुछ ठीक है? आप तुरीय ध्यान मार्ग का आश्रय लेकर स्थूल, सूक्ष्म और कारण इन तीनों शरीरों से ऊपर उठ गए हैं, जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति इन तीनों अवस्थाओं से परे। यह मेरे मन को आश्चर्यचकित कर रहा है।" 1-2 | mahabharat अध्याय 12.46: युधिष्ठिर और श्रीकृष्णका संवाद, श्रीकृष्णद्वारा भीष्मकी प्रशंसा और युधिष्ठिरको उनके पास चलनेका आदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर ने पूछा, "हे परम पराक्रमी एवं जगत के रक्षक पुरुषोत्तम! आप किसका ध्यान कर रहे हैं? यह बड़े आश्चर्य की बात है! क्या तीनों लोकों में सब कुछ ठीक है? आप तुरीय ध्यान मार्ग का आश्रय लेकर स्थूल, सूक्ष्म और कारण इन तीनों शरीरों से ऊपर उठ गए हैं, जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति इन तीनों अवस्थाओं से परे। यह मेरे मन को आश्चर्यचकित कर रहा है।" 1-2
Yudhishthira asked, "O most valiant and the protector of the world, Purushottama! Who are you meditating upon? This is a matter of great surprise! Is everything in the three worlds fine? You have risen above the three bodies, gross, subtle and causal, by taking recourse to the Turiya meditation path, beyond the three states of wakefulness, dream and deep sleep. This is astonishing my mind." 1-2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥