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mahabharat 12.45.9: दानवीरों में श्रेष्ठ युधिष्ठिर ने समस्त आश्रित लोगों को अन्न, नाना प्रकार के वस्त्र, शय्या और आसन देकर संतुष्ट किया॥9॥   |   mahabharat अध्याय 12.45: युधिष्ठिरके द्वारा ब्राह्मणों तथा आश्रितोंका सत्कार एवं दान और श्रीकृष्णके पास जाकर उनकी स्तुति करते हुए कृतज्ञता-प्रकाशन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 45: युधिष्ठिरके द्वारा ब्राह्मणों तथा आश्रितोंका सत्कार एवं दान और श्रीकृष्णके पास जाकर उनकी स्तुति करते हुए कृतज्ञता-प्रकाशन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.45.9 
भक्ष्यान्नपानैर्विविधैर्वासोभि: शयनासनै:।
सर्वान् संतोषयामास संश्रितान् ददतां वर:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
दानवीरों में श्रेष्ठ युधिष्ठिर ने समस्त आश्रित लोगों को अन्न, नाना प्रकार के वस्त्र, शय्या और आसन देकर संतुष्ट किया॥9॥
 
Yudhishthira, the best among givers, satisfied all the dependent people by giving them food items, various types of clothes, beds and seats. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)