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mahabharat 12.45.7: अपने पुरोहित धौम्य को उन्होंने दस हजार गायें, धन, सोना, चांदी और विभिन्न प्रकार के वस्त्र दिये।   |   mahabharat अध्याय 12.45: युधिष्ठिरके द्वारा ब्राह्मणों तथा आश्रितोंका सत्कार एवं दान और श्रीकृष्णके पास जाकर उनकी स्तुति करते हुए कृतज्ञता-प्रकाशन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 45: युधिष्ठिरके द्वारा ब्राह्मणों तथा आश्रितोंका सत्कार एवं दान और श्रीकृष्णके पास जाकर उनकी स्तुति करते हुए कृतज्ञता-प्रकाशन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.45.7 
पुरोहिताय धौम्याय प्रादादयुतश: स गा:।
धनं सुवर्णं रजतं वासांसि विविधान्यपि॥ ७॥
 
 
अनुवाद
अपने पुरोहित धौम्य को उन्होंने दस हजार गायें, धन, सोना, चांदी और विभिन्न प्रकार के वस्त्र दिये।
 
To his priest Dhoumya, he gave ten thousand cows, wealth, gold, silver and various kinds of clothes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)