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mahabharat 12.45.3: वैशम्पायन बोले, 'हे निष्पाप राजन! मैं तुम्हें वही सब बताता हूँ जो पाण्डवों ने भगवान श्रीकृष्ण को बहकाकर किया था। ध्यानपूर्वक सुनो।'   |   mahabharat अध्याय 12.45: युधिष्ठिरके द्वारा ब्राह्मणों तथा आश्रितोंका सत्कार एवं दान और श्रीकृष्णके पास जाकर उनकी स्तुति करते हुए कृतज्ञता-प्रकाशन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 45: युधिष्ठिरके द्वारा ब्राह्मणों तथा आश्रितोंका सत्कार एवं दान और श्रीकृष्णके पास जाकर उनकी स्तुति करते हुए कृतज्ञता-प्रकाशन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.45.3 
वैशम्पायन उवाच
शृणु तत्त्वेन राजेन्द्र कीर्त्यमानं मयानघ।
वासुदेवं पुरस्कृत्य यदकुर्वत पाण्डवा:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन बोले, 'हे निष्पाप राजन! मैं तुम्हें वही सब बताता हूँ जो पाण्डवों ने भगवान श्रीकृष्ण को बहकाकर किया था। ध्यानपूर्वक सुनो।'
 
Vaishmpayana said, 'O sinless king! I am telling you exactly what the Pandavas did by leading Lord Krishna. Listen carefully.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)