Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.45.18-20h: हे ज्ञानियों में श्रेष्ठ श्रीकृष्ण! क्या बुद्धि की देवी आपकी शरण में आई हैं? हे प्रभु! आपकी कृपा से ही हमें राज्य प्राप्त हुआ है और यह पृथ्वी हमारे अधीन हो गई है। हे प्रभु! आप ही तीनों लोकों के आश्रय और बल हैं। आपकी कृपा से ही हमें विजय और महान यश प्राप्त हुआ है और हम धर्म से विचलित नहीं हुए हैं।॥18-19 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.45: युधिष्ठिरके द्वारा ब्राह्मणों तथा आश्रितोंका सत्कार एवं दान और श्रीकृष्णके पास जाकर उनकी स्तुति करते हुए कृतज्ञता-प्रकाशन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 45: युधिष्ठिरके द्वारा ब्राह्मणों तथा आश्रितोंका सत्कार एवं दान और श्रीकृष्णके पास जाकर उनकी स्तुति करते हुए कृतज्ञता-प्रकाशन  »  श्लोक 18-20h
 
 
श्लोक  12.45.18-20h 
तथैवोपश्रिता देवी बुद्धिर्बुद्धिमतां वर॥ १८॥
वयं राज्यमनुप्राप्ता: पृथिवी च वशे स्थिता।
तव प्रसादाद् भगवंस्त्रिलोकगतिविक्रम॥ १९॥
जयं प्राप्ता यशश्चाग्र्यं न च धर्मच्युता वयम्।
 
 
अनुवाद
हे ज्ञानियों में श्रेष्ठ श्रीकृष्ण! क्या बुद्धि की देवी आपकी शरण में आई हैं? हे प्रभु! आपकी कृपा से ही हमें राज्य प्राप्त हुआ है और यह पृथ्वी हमारे अधीन हो गई है। हे प्रभु! आप ही तीनों लोकों के आश्रय और बल हैं। आपकी कृपा से ही हमें विजय और महान यश प्राप्त हुआ है और हम धर्म से विचलित नहीं हुए हैं।॥18-19 1/2॥
 
‘O Shri Krishna, the best among the wise! Has the goddess of wisdom taken refuge in you? Lord! It is by your grace that we have attained the kingdom and this earth has come under our control. O Lord! You are the shelter and strength of the three worlds. It is by your mercy that we have achieved victory and great fame and have not deviated from Dharma.’॥ 18-19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)