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mahabharat 12.45.17-18h: हे बुद्धिमानों में श्रेष्ठ अच्युत! क्या तुमने रात्रि सुखपूर्वक बिताई? क्या तुम्हारी सभी इन्द्रियाँ प्रसन्न हैं?॥17 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.45: युधिष्ठिरके द्वारा ब्राह्मणों तथा आश्रितोंका सत्कार एवं दान और श्रीकृष्णके पास जाकर उनकी स्तुति करते हुए कृतज्ञता-प्रकाशन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 45: युधिष्ठिरके द्वारा ब्राह्मणों तथा आश्रितोंका सत्कार एवं दान और श्रीकृष्णके पास जाकर उनकी स्तुति करते हुए कृतज्ञता-प्रकाशन  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  12.45.17-18h 
सुखेन ते निशा कच्चिद् व्युष्टा बुद्धिमतां वर॥ १७॥
कच्चिज्ज्ञानानि सर्वाणि प्रसन्नानि तवाच्युत।
 
 
अनुवाद
हे बुद्धिमानों में श्रेष्ठ अच्युत! क्या तुमने रात्रि सुखपूर्वक बिताई? क्या तुम्हारी सभी इन्द्रियाँ प्रसन्न हैं?॥17 1/2॥
 
‘Achyuta, the best among the wise! Did you spend the night comfortably? Are all your senses happy?॥ 17 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)