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mahabharat 12.45.15: उनके वक्षस्थल पर स्थित कौस्तुभ मणि अपना प्रकाश फैलाकर उनकी शोभा को इस प्रकार बढ़ा रही है मानो उदित होता हुआ सूर्य क्षितिज को प्रकाशित कर रहा हो ॥15॥   |   mahabharat अध्याय 12.45: युधिष्ठिरके द्वारा ब्राह्मणों तथा आश्रितोंका सत्कार एवं दान और श्रीकृष्णके पास जाकर उनकी स्तुति करते हुए कृतज्ञता-प्रकाशन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 45: युधिष्ठिरके द्वारा ब्राह्मणों तथा आश्रितोंका सत्कार एवं दान और श्रीकृष्णके पास जाकर उनकी स्तुति करते हुए कृतज्ञता-प्रकाशन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.45.15 
कौस्तुभेनोरसिस्थेन मणिनाभिविराजितम्।
उद्यतेवोदयं शैलं सूर्येणाभिविराजितम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
उनके वक्षस्थल पर स्थित कौस्तुभ मणि अपना प्रकाश फैलाकर उनकी शोभा को इस प्रकार बढ़ा रही है मानो उदित होता हुआ सूर्य क्षितिज को प्रकाशित कर रहा हो ॥15॥
 
The Kaustubha gem situated on His chest spreads its light and enhances His beauty as if the rising sun is illuminating the horizon. ॥15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)