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श्लोक  12.45.1 
जनमेजय उवाच
प्राप्य राज्यं महाबाहुर्धर्मपुत्रो युधिष्ठिर:।
यदन्यदकरोद् विप्र तन्मे वक्तुमिहार्हसि॥ १॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय ने पूछा - "हे ब्रह्मन्! राज्य प्राप्त करने के बाद धर्मपुत्र महाबाहु युधिष्ठिर ने और कौन-कौन से कर्म किए? कृपया मुझे उनके विषय में बताइए।"
 
Janamejaya asked - Brahmin! After getting the kingdom, what other deeds did Dharmaputra Mahabahu Yudhishthira do? Kindly tell me about them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)