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श्लोक 12.44.8-9  |
यथा दुर्योधनगृहं तथा दु:शासनस्य तु।
प्रासादमालासंयुक्तं हेमतोरणभूषितम्॥ ८॥
दासीदाससुसम्पूर्णं प्रभूतधनधान्यवत् ।
प्रतिपेदे महाबाहुरर्जुनो राजशासनात्॥ ९॥ |
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| अनुवाद |
| जैसे दुर्योधन का महल सुशोभित था, वैसे ही दु:शासन का महल भी सुशोभित था। वहाँ भी महल की मालाएँ सुशोभित थीं। वह स्वर्णिम झालरों से सुसज्जित था। वह प्रचुर धन-धान्य और दास-दासियों से परिपूर्ण था। राजा की अनुमति से महाबली अर्जुन ने वह महल प्राप्त किया। 8-9. |
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| Just like Duryodhan's palace was decorated, so was Dushasan's palace. There too, palace garlands were adorning it. It was decorated with golden festoons. It was full of abundant wealth and grains and slaves. With the king's permission, the powerful Arjun got that palace. 8-9. |
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