श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 44: महाराज युधिष्ठिरके दिये हुए विभिन्न भवनोंमें भीमसेन आदि सब भाइयोंका प्रवेश और विश्राम  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.44.5 
यथासुखं यथाजोषं जयोऽयमनुभूयताम्।
विश्रान्ताँल्लब्धविज्ञानान् श्व: समेतास्मि व: पुन:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
अब आप सब लोग इस विजय का भरपूर आनन्द लें। कल जब आप अच्छी तरह विश्राम कर लेंगे और आपका मन स्वस्थ हो जाएगा, तब मैं आपसे मिलूँगा। ॥5॥
 
‘Now you all should enjoy this victory to your heart's content. I will meet you tomorrow after taking a good rest and when your mind is healthy.' ॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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