श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 44: महाराज युधिष्ठिरके दिये हुए विभिन्न भवनोंमें भीमसेन आदि सब भाइयोंका प्रवेश और विश्राम  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.44.4 
अरण्ये दु:खवसतीर्मत्कृते भरतर्षभा:।
भवद्भिरनुभूता हि यथा कुपुरुषैस्तथा॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ वीरों! मेरे लिए तुमने वैसे ही दुःख और कष्ट सहे हैं जैसे कोई अभागा मनुष्य वन में रहकर कष्ट सहता है॥4॥
 
'O best of the heroes of Bharata! For my sake you have suffered pain and hardships just as an unfortunate man suffers while living in the forest.॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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