श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 44: महाराज युधिष्ठिरके दिये हुए विभिन्न भवनोंमें भीमसेन आदि सब भाइयोंका प्रवेश और विश्राम  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.44.3 
शत्रुभिर्विविधै: शस्त्रै: क्षतदेहा महारणे।
श्रान्ता भवन्त: सुभृशं तापिता: शोकमन्युभि:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
‘मित्रो! इस महायुद्ध में शत्रुओं ने नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों से तुम्हारे शरीरों को घायल कर दिया है। तुम सब लोग अत्यन्त थक गए हो और शोक तथा क्रोध ने तुम्हें पीड़ा पहुँचाई है॥3॥
 
‘Friends! In this great war the enemies have injured your bodies with various types of weapons. All of you are extremely tired and grief and anger have tormented you.॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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