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mahabharat 12.44.2: इसके बाद श्री महाराज युधिष्ठिर ने भयानक वीर भीमसेन, अर्जुन तथा नकुल-सहदेव को सान्त्वना देते हुए कहा-॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 12.44: महाराज युधिष्ठिरके दिये हुए विभिन्न भवनोंमें भीमसेन आदि सब भाइयोंका प्रवेश और विश्राम   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 44: महाराज युधिष्ठिरके दिये हुए विभिन्न भवनोंमें भीमसेन आदि सब भाइयोंका प्रवेश और विश्राम  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.44.2 
ततो युधिष्ठिरो राजा भीमं भीमपराक्रमम्।
सान्त्वयन्नब्रवीच्छ्रीमानर्जुनं यमजौ तथा॥ २॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद श्री महाराज युधिष्ठिर ने भयानक वीर भीमसेन, अर्जुन तथा नकुल-सहदेव को सान्त्वना देते हुए कहा-॥ 2॥
 
After this, Shri Maharaj Yudhishthir, while consoling the dreadfully brave Bhimsen, Arjun and Nakul-Sahadeva, said – ॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)