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श्लोक 12.44.16  |
तत्र भक्ष्यान्नपानैस्ते मुदिता: सुसुखोषित:।
सुखप्रबुद्धा राजानमुपतस्थुर्युधिष्ठिरम्॥ १६॥ |
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| अनुवाद |
| वहाँ अपने-अपने स्थान पर भोजन-पानी से तृप्त होकर वे सब लोग रात भर सुखपूर्वक सोए और प्रातःकाल उठकर राजा युधिष्ठिर की सेवा में उपस्थित हुए॥16॥ |
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| There, satisfied with the food and drink in their respective places, they all slept comfortably the whole night and got up in the morning and presented themselves in the service of King Yudhishthira.॥ 16॥ |
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इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि गृहविभागे चतुश्चत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें गृहोंका विभाजनविषयक चौवालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४४॥
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