Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.44.12-13: दुर्मुख का उत्तम महल और भी अधिक सुन्दर था। वह सोने से अलंकृत था। खिले हुए कमल के समान नेत्रों वाली सुन्दर स्त्रियों के शयन-बिस्तरों से युक्त वह महल युधिष्ठिर ने सहदेव को दे दिया, जो उनसे सदैव प्रेम करता था। जिस प्रकार कुबेर कैलाश पाकर संतुष्ट हुए थे, उसी प्रकार सहदेव भी उस सुन्दर महल को पाकर अत्यन्त प्रसन्न हुए। 12-13। | mahabharat अध्याय 12.44: महाराज युधिष्ठिरके दिये हुए विभिन्न भवनोंमें भीमसेन आदि सब भाइयोंका प्रवेश और विश्राम । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दुर्मुख का उत्तम महल और भी अधिक सुन्दर था। वह सोने से अलंकृत था। खिले हुए कमल के समान नेत्रों वाली सुन्दर स्त्रियों के शयन-बिस्तरों से युक्त वह महल युधिष्ठिर ने सहदेव को दे दिया, जो उनसे सदैव प्रेम करता था। जिस प्रकार कुबेर कैलाश पाकर संतुष्ट हुए थे, उसी प्रकार सहदेव भी उस सुन्दर महल को पाकर अत्यन्त प्रसन्न हुए। 12-13।
The best palace of Durmukha was even more beautiful. It was decorated with gold. Yudhishthira gave that palace filled with beds of beautiful women with eyes like blooming lotus petals to Sahadeva, who always loved him. Just as Kubera was satisfied on getting Kailash, in the same way Sahadeva was very happy on getting that beautiful palace. 12-13.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥