श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 44: महाराज युधिष्ठिरके दिये हुए विभिन्न भवनोंमें भीमसेन आदि सब भाइयोंका प्रवेश और विश्राम  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.44.1 
वैशम्पायन उवाच
ततो विसर्जयामास सर्वा: प्रकृतयो नृप:।
विविशुश्चाभ्यनुज्ञाता यथास्वानि गृहाणि ते॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं- हे राजन! तत्पश्चात राजा युधिष्ठिर ने मंत्रियों, प्रजा तथा समस्त प्राणियों को विदा किया। राजा की आज्ञा पाकर सभी लोग अपने-अपने घर चले गए।
 
Vaishampayana says- O King! Thereafter King Yudhishthira bid farewell to the ministers, subjects and all the living creatures. After taking the king's orders, all the people went to their respective homes.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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