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mahabharat 12.43.d1: जो मनुष्य धर्मराज युधिष्ठिर द्वारा वर्णित भगवान कृष्ण के इन सौ नामों का पाठ करता है या सुनता है, वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है।   |   mahabharat अध्याय 12.43: युधिष्ठिरद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 43: युधिष्ठिरद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  12.43.d1 
(एतन्नामशतं विष्णोर्धर्मराजेन कीर्तितम्।
य: पठेच्छृणुयाद् वापि सर्वपापै: प्रमुच्यते॥ )
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य धर्मराज युधिष्ठिर द्वारा वर्णित भगवान कृष्ण के इन सौ नामों का पाठ करता है या सुनता है, वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है।
 
One who recites or listens to these hundred names of Lord Krishna, as narrated by Dharmaraja Yudhishthira, becomes free from all sins.
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि वासुदेवस्तुतौ त्रिचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुतिविषयक तैंतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४३॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल १८ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)