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mahabharat 12.43.8: ‘वराह, अग्नि, बृहद्भानु (सूर्य), वृषभ (धर्म), गरुड़ध्वज, अनिक्षह (शत्रु सेना के वेग को सहन करने वाले), पुरुष (अन्तर्यामी), शिपिविष्ट (सबके शरीर में आत्मा रूप में प्रविष्ट) और उरुक्रम (वामन) – ये सब आपके ही नाम और रूप हैं। 8॥   |   mahabharat अध्याय 12.43: युधिष्ठिरद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 43: युधिष्ठिरद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.43.8 
वराहोऽग्निर्बृहद्भानुर्वृषभस्तार्क्ष्यलक्षण:।
अनीकसाह: पुरुष: शिपिविष्ट उरुक्रम:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
‘वराह, अग्नि, बृहद्भानु (सूर्य), वृषभ (धर्म), गरुड़ध्वज, अनिक्षह (शत्रु सेना के वेग को सहन करने वाले), पुरुष (अन्तर्यामी), शिपिविष्ट (सबके शरीर में आत्मा रूप में प्रविष्ट) और उरुक्रम (वामन) – ये सब आपके ही नाम और रूप हैं। 8॥
 
‘Varaha, Agni, Brihadbhanu (Sun), Vrishabha (Dharma), Garudadhwaja, Aniksaha (one who can withstand the speed of the enemy army), Purush (Antaryami), Shipivishta (entered in the soul form in everyone's body) and Urukram (Vaman) – all these are your names and forms. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)