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mahabharat 12.43.5: यह सम्पूर्ण जगत् आपकी ही लीलामय रचना है। आप इस जगत् की आत्मा हैं। यह जगत् आपसे उत्पन्न हुआ है। आप सर्वव्यापी होने के कारण 'विष्णु' कहलाते हैं, 'जिष्णु' इसलिए कहलाते हैं क्योंकि आप विजयी हैं, 'हरि' इसलिए कहलाते हैं क्योंकि आप दुःखों और पापों का नाश करते हैं, 'कृष्ण' इसलिए कहलाते हैं क्योंकि आप लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं, 'वैकुण्ठ' इसलिए कहलाते हैं क्योंकि आप वैकुण्ठ धाम के अधिपति हैं और 'पुरुषोत्तम' इसलिए कहलाते हैं क्योंकि आप नाशवान पुरुष से भी श्रेष्ठ हैं। आपको नमस्कार है॥ 5॥   |   mahabharat अध्याय 12.43: युधिष्ठिरद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 43: युधिष्ठिरद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.43.5 
विश्वकर्मन् नमस्तेऽस्तु विश्वात्मन् विश्वसम्भव।
विष्णो जिष्णो हरे कृष्ण वैकुण्ठ पुरुषोत्तम॥ ५॥
 
 
अनुवाद
यह सम्पूर्ण जगत् आपकी ही लीलामय रचना है। आप इस जगत् की आत्मा हैं। यह जगत् आपसे उत्पन्न हुआ है। आप सर्वव्यापी होने के कारण 'विष्णु' कहलाते हैं, 'जिष्णु' इसलिए कहलाते हैं क्योंकि आप विजयी हैं, 'हरि' इसलिए कहलाते हैं क्योंकि आप दुःखों और पापों का नाश करते हैं, 'कृष्ण' इसलिए कहलाते हैं क्योंकि आप लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं, 'वैकुण्ठ' इसलिए कहलाते हैं क्योंकि आप वैकुण्ठ धाम के अधिपति हैं और 'पुरुषोत्तम' इसलिए कहलाते हैं क्योंकि आप नाशवान पुरुष से भी श्रेष्ठ हैं। आपको नमस्कार है॥ 5॥
 
‘This entire universe is Your playful creation. You are the soul of this universe. This universe has originated from You. You are called ‘Vishnu’ because you are all-pervasive, ‘Jishnu’ because you are victorious, ‘Hari’ because you take away sorrows and sins, ‘Krishna’ because you attract people towards You, ‘Vaikuntha’ because you are the ruler of the Vaikuntha Dham and ‘Purushottam’ because you are superior to the perishable Purush. Salutations to You.॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)