Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.43.2-3: यदुसिंह श्रीकृष्ण! आपकी कृपा, नीति, बल, बुद्धि और पराक्रम के कारण ही मुझे अपने पूर्वजों का राज्य पुनः प्राप्त हुआ है। हे शत्रुओं का दमन करने वाले कमल-नेत्र! मैं आपको बार-बार नमस्कार करता हूँ॥ 2-3॥ | mahabharat अध्याय 12.43: युधिष्ठिरद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तव कृष्ण प्रसादेन नयेन च बलेन च।
बुद्धॺा च यदुशार्दूल तथा विक्रमणेन च॥ २॥
पुन: प्राप्तमिदं राज्यं पितृपैतामहं मया।
नमस्ते पुण्डरीकाक्ष पुन: पुनररिंदम॥ ३॥
अनुवाद
यदुसिंह श्रीकृष्ण! आपकी कृपा, नीति, बल, बुद्धि और पराक्रम के कारण ही मुझे अपने पूर्वजों का राज्य पुनः प्राप्त हुआ है। हे शत्रुओं का दमन करने वाले कमल-नेत्र! मैं आपको बार-बार नमस्कार करता हूँ॥ 2-3॥
‘Yadusinh Shri Krishna! It is because of your kindness, policy, strength, wisdom and valour that I have again received the kingdom of my forefathers. O lotus-eyed one who suppresses the enemies! I salute you again and again.॥ 2-3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥