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mahabharat 12.43.16: श्रीकृष्ण! आप ही इस जगत के आदि कारण हैं और आप ही इसके संहारक भी हैं। कालचक्र के आरंभ में आप ही इस जगत की रचना करते हैं। जगत के कारण! यह सम्पूर्ण जगत आपके अधीन है। हे धनुष, चक्र और तलवार धारण करने वाले परमात्मा! आपको नमस्कार है।'॥16॥   |   mahabharat अध्याय 12.43: युधिष्ठिरद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 43: युधिष्ठिरद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.43.16 
योनिस्त्वमस्य प्रलयश्च कृष्ण
त्वमेवेदं सृजसे विश्वमग्रे।
विश्वं चेदं त्वद्वशे विश्वयोने
नमोऽस्तु ते शार्ङ्गचक्रासिपाणे॥ १६॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण! आप ही इस जगत के आदि कारण हैं और आप ही इसके संहारक भी हैं। कालचक्र के आरंभ में आप ही इस जगत की रचना करते हैं। जगत के कारण! यह सम्पूर्ण जगत आपके अधीन है। हे धनुष, चक्र और तलवार धारण करने वाले परमात्मा! आपको नमस्कार है।'॥16॥
 
‘Sri Krishna! You are the initial cause of this universe and you are also its destruction. At the beginning of the cycle of time, you are the one who creates this universe. Cause of the universe! This entire universe is under your control. O Supreme Soul who holds bow, discus and sword in his hands! Salutations to you.’॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)