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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 42: राजा युधिष्ठिर तथा धृतराष्ट्रका युद्धमें मारे गये सगे-सम्बन्धियों तथा अन्य राजाओंके लिये श्राद्धकर्म करना  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  12.42.8-9h 
स तेषामनृणो भूत्वा गत्वा लोकेष्ववाच्यताम्॥ ८॥
कृतकृत्योऽभवद् राजा प्रजा धर्मेण पालयन्।
 
 
अनुवाद
इन सबके ऋण से मुक्त होकर, वे अब संसार में निन्दा या दोषारोपण के पात्र नहीं रहे। राजा युधिष्ठिर अपनी प्रजा का धर्मपूर्वक पालन करके तृप्त होने लगे।
 
Freed from the debt of all these, he was no longer the object of criticism or accusation in the world. King Yudhishthira began to feel fulfilled by taking care of his subjects righteously. 8 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)