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mahabharat 12.41.8-9: इसके बाद राजा युधिष्ठिर ने नगर और जनपद के निवासियों को अपनी इच्छानुसार अपने-अपने स्थान पर जाने का आदेश दिया। उन्हें विदा करके कुरुपुत्र युधिष्ठिर ने कुन्तीपुत्र भीमसेन को युवराज पद पर विराजमान किया।   |   mahabharat अध्याय 12.41: राजा युधिष्ठिरका धृतराष्ट्रके अधीन रहकर राज्यकी व्यवस्थाके लिये भाइयों तथा अन्य लोगोंको विभिन्न कार्योंपर नियुक्त करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 41: राजा युधिष्ठिरका धृतराष्ट्रके अधीन रहकर राज्यकी व्यवस्थाके लिये भाइयों तथा अन्य लोगोंको विभिन्न कार्योंपर नियुक्त करना  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  12.41.8-9 
अनुज्ञाप्याथ तान् राजा यथेष्टं गम्यतामिति॥ ८॥
पौरजानपदान् सर्वान् विसृज्य कुरुनन्दन:।
यौवराज्येन कौन्तेयं भीमसेनमयोजयत्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद राजा युधिष्ठिर ने नगर और जनपद के निवासियों को अपनी इच्छानुसार अपने-अपने स्थान पर जाने का आदेश दिया। उन्हें विदा करके कुरुपुत्र युधिष्ठिर ने कुन्तीपुत्र भीमसेन को युवराज पद पर विराजमान किया।
 
After this, King Yudhishthira ordered the residents of the city and the district to go to their respective places as per their wish. After bidding them farewell, Yudhishthira, the son of Kuru, enthroned Kunti's son Bhimasena as the crown prince. 8-9.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)