Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.41.6: यदि आप सभी मित्र मुझ पर कृपालु हैं, तो आप राजा धृतराष्ट्र के प्रति वैसा ही भाव और व्यवहार रखें जैसा पहले रखते थे॥6॥   |   mahabharat अध्याय 12.41: राजा युधिष्ठिरका धृतराष्ट्रके अधीन रहकर राज्यकी व्यवस्थाके लिये भाइयों तथा अन्य लोगोंको विभिन्न कार्योंपर नियुक्त करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 41: राजा युधिष्ठिरका धृतराष्ट्रके अधीन रहकर राज्यकी व्यवस्थाके लिये भाइयों तथा अन्य लोगोंको विभिन्न कार्योंपर नियुक्त करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.41.6 
यदि चाहमनुग्राह्यो भवतां सुहृदां तथा।
धृतराष्ट्रे यथापूर्वं वृत्तिं वर्तितुमर्हथ॥ ६॥
 
 
अनुवाद
यदि आप सभी मित्र मुझ पर कृपालु हैं, तो आप राजा धृतराष्ट्र के प्रति वैसा ही भाव और व्यवहार रखें जैसा पहले रखते थे॥6॥
 
'If all of you friends are gracious to me, then you should maintain the same feelings and behaviour towards King Dhritarashtra as you did earlier.॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)