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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 41: राजा युधिष्ठिरका धृतराष्ट्रके अधीन रहकर राज्यकी व्यवस्थाके लिये भाइयों तथा अन्य लोगोंको विभिन्न कार्योंपर नियुक्त करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.41.3 
अनुग्राह्या वयं नूनं भवतामिति मे मति:।
यदेवं गुणसम्पन्नानस्मान् ब्रूथ विमत्सरा:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हमारा विश्वास है कि आप लोग हमें अवश्य ही अपनी कृपा का पात्र समझते हैं, इसीलिए ईर्ष्या-द्वेष छोड़कर आप हमें सद्गुणों से युक्त बता रहे हैं।
 
'We believe that you people definitely consider us worthy of your grace, that is why, leaving aside jealousy and hatred, you are describing us as endowed with virtues.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)