श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 41: राजा युधिष्ठिरका धृतराष्ट्रके अधीन रहकर राज्यकी व्यवस्थाके लिये भाइयों तथा अन्य लोगोंको विभिन्न कार्योंपर नियुक्त करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.41.2 
धन्या: पाण्डुसुता नूनं येषां ब्राह्मणपुङ्गवा:।
तथ्यान् वाप्यथवातथ्यान् गुणानाहु: समागता:॥ २॥
 
 
अनुवाद
हम पाण्डव निश्चय ही धन्य हैं, जिनके गुणों की प्रशंसा यहाँ आये हुए सभी ब्राह्मण कर रहे हैं। चाहे हममें वे गुण हों या न हों, फिर भी आप लोग हमें गुणवान कह रहे हैं॥ 2॥
 
‘We Pandavas are certainly blessed, whose qualities are being praised by all the Brahmins who have come here. Whether we actually possess those qualities or not, you people are calling us virtuous.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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