श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 41: राजा युधिष्ठिरका धृतराष्ट्रके अधीन रहकर राज्यकी व्यवस्थाके लिये भाइयों तथा अन्य लोगोंको विभिन्न कार्योंपर नियुक्त करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.41.1 
वैशम्पायन उवाच
प्रकृतीनां च तद् वाक्यं देशकालोपबृंहितम्।
श्रुत्वा युधिष्ठिरो राजा चोत्तरं प्रत्यभाषत॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - 'जनमेजय! देश और काल के विषय में मन्त्रियों, प्रजा आदि के वचन सुनकर राजा युधिष्ठिर ने उनसे कहा - '॥1॥
 
Vaishmpayana says, 'Janamejaya! On hearing the words of the ministers, the subjects etc. regarding the country and the times, king Yudhishthira replied to them saying, '॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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