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mahabharat 12.40.12-14: भगवान कृष्ण की आज्ञा से पुरोहित धौम्य ने पूर्व और उत्तर की ओर नीची एक वेदी बनाई। उसे गोबर से लीपकर कुशा से पंक्तिबद्ध किया गया। इस प्रकार वेदी को पवित्र करके उन्होंने सर्वतोभद्र नामक आसन पर व्याघ्रचर्म और श्वेत वस्त्र बिछाकर महात्मा युधिष्ठिर और द्रुपदपुत्री कृष्णा को उस पर बैठाया। उस आसन के पाए और आधार अत्यंत मजबूत थे। स्वर्णजड़ित होने के कारण वह आसन प्रज्वलित अग्नि के समान चमक रहा था। बुद्धिमान पुरोहित ने वेदी पर अग्नि स्थापित की और उसमें विधि-विधान एवं मंत्रों सहित आहुति दी। 12-14   |   mahabharat अध्याय 12.40: युधिष्ठिरका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.40.12-14 
दाशार्हेणाभ्यनुज्ञातस्तत्र धौम्य: पुरोहित:।
प्रागुदक्प्रवणां वेदीं लक्षणेनोपलिख्य च॥ १२॥
व्याघ्रचर्मोत्तरे शुक्ले सर्वतोभद्र आसने।
दृढपादप्रतिष्ठाने हुताशनसमत्विषि॥ १३॥
उपवेश्य महात्मानं कृष्णां च द्रुपदात्मजाम्।
जुहाव पावकं धीमान् विधिमन्त्रपुरस्कृतम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
भगवान कृष्ण की आज्ञा से पुरोहित धौम्य ने पूर्व और उत्तर की ओर नीची एक वेदी बनाई। उसे गोबर से लीपकर कुशा से पंक्तिबद्ध किया गया। इस प्रकार वेदी को पवित्र करके उन्होंने सर्वतोभद्र नामक आसन पर व्याघ्रचर्म और श्वेत वस्त्र बिछाकर महात्मा युधिष्ठिर और द्रुपदपुत्री कृष्णा को उस पर बैठाया। उस आसन के पाए और आधार अत्यंत मजबूत थे। स्वर्णजड़ित होने के कारण वह आसन प्रज्वलित अग्नि के समान चमक रहा था। बुद्धिमान पुरोहित ने वेदी पर अग्नि स्थापित की और उसमें विधि-विधान एवं मंत्रों सहित आहुति दी। 12-14
 
By the order of Lord Krishna, priest Dhoumya made a altar which was low towards the east and north. It was plastered with cow dung and lined with kusha grass. Thus, after sanctifying the altar, he spread tiger skin and white cloth on a stool called Sarvatobhadra and made Mahatma Yudhishthira and Drupada's daughter Krishna sit on it. The legs and seating base of that stool were very strong. Because of being studded with gold, the seat was shining like a blazing fire. The wise priest established fire on the altar and offered oblations in it with the rituals and mantras. 12-14.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)