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mahabharat 12.4.16: जैसे बादल दो पर्वतों पर जल की धाराएँ बरसाते हैं, उसी प्रकार महान क्रोध में भरे हुए राजा कर्ण और दुर्योधन दोनों पर टूट पड़े और उन पर बाणों की वर्षा करने लगे॥16॥   |   mahabharat अध्याय 12.4: कर्णकी सहायतासे समागत राजाओंको पराजित करके दुर्योधनद्वारा स्वयंवरसे कलिंगराजकी कन्याका अपहरण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 4: कर्णकी सहायतासे समागत राजाओंको पराजित करके दुर्योधनद्वारा स्वयंवरसे कलिंगराजकी कन्याका अपहरण  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.4.16 
तेऽभ्यधावन्त संक्रुद्धा: कर्णदुर्योधनावुभौ।
शरवर्षाणि मुञ्चन्तो मेघा: पर्वतयोरिव॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जैसे बादल दो पर्वतों पर जल की धाराएँ बरसाते हैं, उसी प्रकार महान क्रोध में भरे हुए राजा कर्ण और दुर्योधन दोनों पर टूट पड़े और उन पर बाणों की वर्षा करने लगे॥16॥
 
Just as clouds pour down torrents of water on two mountains, similarly, filled with great anger, the King fell upon both Karna and Duryodhana and began showering arrows upon them.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)