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mahabharat 12.39.5: जगत के स्वामी भगवान ब्रह्मा ने उसे यह उत्तम वर दिया और कहा, "तुम्हें ब्राह्मण का अपमान करने वाले के अतिरिक्त किसी और चीज़ से डरना नहीं चाहिए।" इस प्रकार उन्होंने उसे समस्त प्राणियों से सुरक्षा प्रदान की ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 12.39: चार्वाकको प्राप्त हुए वर आदिका श्रीकृष्णद्वारा वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 39: चार्वाकको प्राप्त हुए वर आदिका श्रीकृष्णद्वारा वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.39.5 
द्विजावमानादन्यत्र प्रादाद् वरमनुत्तमम्।
अभयं सर्वभूतेभ्यो ददौ तस्मै जगत‍्पति:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जगत के स्वामी भगवान ब्रह्मा ने उसे यह उत्तम वर दिया और कहा, "तुम्हें ब्राह्मण का अपमान करने वाले के अतिरिक्त किसी और चीज़ से डरना नहीं चाहिए।" इस प्रकार उन्होंने उसे समस्त प्राणियों से सुरक्षा प्रदान की ॥5॥
 
Lord Brahma, the lord of the universe, gave him this supreme boon and said, "You have nothing to fear except that which insults a Brahmin." Thus, he gave him protection from all living creatures. ॥5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)