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mahabharat 12.39.4: हे भरतपुत्र! ब्रह्माजी के बार-बार वर माँगने के आग्रह पर उन्होंने केवल एक ही वर माँगा कि उन्हें किसी भी प्राणी से भय न हो॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.39: चार्वाकको प्राप्त हुए वर आदिका श्रीकृष्णद्वारा वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 39: चार्वाकको प्राप्त हुए वर आदिका श्रीकृष्णद्वारा वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.39.4 
वरेण च्छन्द्यमानश्च ब्रह्मणा च पुन: पुन:।
अभयं सर्वभूतेभ्यो वरयामास भारत॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे भरतपुत्र! ब्रह्माजी के बार-बार वर माँगने के आग्रह पर उन्होंने केवल एक ही वर माँगा कि उन्हें किसी भी प्राणी से भय न हो॥4॥
 
O son of Bharat! When Brahmaji repeatedly requested him to ask for a boon, he asked for only one boon that he should not be afraid of any living creature. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)