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mahabharat 12.39.2: श्रीकृष्ण बोले - पिताश्री! इस संसार में ब्राह्मण मेरे लिए सदैव पूजनीय हैं। वे पृथ्वी पर विचरण करने वाले देवता हैं। जब वे क्रोधित होते हैं, तो उनके वचन विष के समान प्रभाव डालते हैं। वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं और दूसरों को भी प्रसन्न करते हैं॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 12.39: चार्वाकको प्राप्त हुए वर आदिका श्रीकृष्णद्वारा वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 39: चार्वाकको प्राप्त हुए वर आदिका श्रीकृष्णद्वारा वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.39.2 
वासुदेव उवाच
ब्राह्मणास्तात लोकेऽस्मिन्नर्चनीया: सदा मम।
एते भूमिचरा देवा वाग्विषा: सुप्रसादका:॥ २॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण बोले - पिताश्री! इस संसार में ब्राह्मण मेरे लिए सदैव पूजनीय हैं। वे पृथ्वी पर विचरण करने वाले देवता हैं। जब वे क्रोधित होते हैं, तो उनके वचन विष के समान प्रभाव डालते हैं। वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं और दूसरों को भी प्रसन्न करते हैं॥ 2॥
 
Shri Krishna said - Father! In this world, Brahmins are always worship-worthy for me. They are gods who roam on the earth. When they are angry, their words have the effect of poison. They are easily pleased and also make others happy.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)