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mahabharat 12.39.13: अच्युत! अब तुम्हें अपना कर्तव्य पालन करना चाहिए। तुम्हारे मन में पश्चाताप नहीं होना चाहिए। तुम्हें अपने शत्रुओं का वध करना चाहिए, अपनी प्रजा की रक्षा करनी चाहिए और ब्राह्मणों का आदर करते रहना चाहिए॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.39: चार्वाकको प्राप्त हुए वर आदिका श्रीकृष्णद्वारा वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 39: चार्वाकको प्राप्त हुए वर आदिका श्रीकृष्णद्वारा वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.39.13 
स त्वमातिष्ठ कार्याणि मा तेऽभूद् ग्लानिरच्युत।
शत्रून् जहि प्रजा रक्ष द्विजांश्च परिपूजय॥ १३॥
 
 
अनुवाद
अच्युत! अब तुम्हें अपना कर्तव्य पालन करना चाहिए। तुम्हारे मन में पश्चाताप नहीं होना चाहिए। तुम्हें अपने शत्रुओं का वध करना चाहिए, अपनी प्रजा की रक्षा करनी चाहिए और ब्राह्मणों का आदर करते रहना चाहिए॥13॥
 
Achyuta! Now you should perform your duties. There should be no remorse in your mind. You should kill your enemies, protect your subjects and keep respecting the Brahmins.॥ 13॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि चार्वाकवरदानादिकथने एकोनचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ३९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें चार्वाकको प्राप्त हुए वरदान आदिका वर्णनविषयक उनतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३९॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)