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mahabharat 12.39.1: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! तत्पश्चात् सर्वदर्शी देवकीनन्दन भगवान श्रीकृष्ण ने वहाँ भाइयों सहित खड़े हुए राजा युधिष्ठिर से कहा॥1॥   |   mahabharat अध्याय 12.39: चार्वाकको प्राप्त हुए वर आदिका श्रीकृष्णद्वारा वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 39: चार्वाकको प्राप्त हुए वर आदिका श्रीकृष्णद्वारा वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.39.1 
वैशम्पायन उवाच
ततस्तत्र तु राजानं तिष्ठन्तं भ्रातृभि: सह।
उवाच देवकीपुत्र: सर्वदर्शी जनार्दन:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! तत्पश्चात् सर्वदर्शी देवकीनन्दन भगवान श्रीकृष्ण ने वहाँ भाइयों सहित खड़े हुए राजा युधिष्ठिर से कहा॥1॥
 
Vaishampayanji says – Janamejaya! Thereafter, Lord Shri Krishna, the all-seeing Devkinandan, said to King Yudhishthira standing there along with his brothers. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)