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mahabharat 12.38.5-6h: वह बोली - 'कल्याणी! पांचाल राजकुमारी! तुम धन्य हो, जो इन पाँचों महापुरुषों की सेवा में उसी प्रकार उपस्थित रहती हो, जैसे गौतमवंश में उत्पन्न जटिला अनेक महर्षियों की सेवा करती है। भाविनी! तुम्हारे सभी पुण्यकर्म अचूक हैं और तुम्हारे सभी व्रत सफल होते हैं। 5 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.38: नगर-प्रवेशके समय पुरवासियों तथा ब्राह्मणोंद्वारा राजा युधिष्ठिरका सत्कार और उनपर आक्षेप करनेवाले चार्वाकका ब्राह्मणोंद्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 38: नगर-प्रवेशके समय पुरवासियों तथा ब्राह्मणोंद्वारा राजा युधिष्ठिरका सत्कार और उनपर आक्षेप करनेवाले चार्वाकका ब्राह्मणोंद्वारा वध  »  श्लोक 5-6h
 
 
श्लोक  12.38.5-6h 
धन्या त्वमसि पाञ्चालि या त्वं पुरुषसत्तमान्।
उपतिष्ठसि कल्याणि महर्षीनिव गौतमी॥ ५॥
तव कर्माण्यमोघानि व्रतचर्या च भाविनि।
 
 
अनुवाद
वह बोली - 'कल्याणी! पांचाल राजकुमारी! तुम धन्य हो, जो इन पाँचों महापुरुषों की सेवा में उसी प्रकार उपस्थित रहती हो, जैसे गौतमवंश में उत्पन्न जटिला अनेक महर्षियों की सेवा करती है। भाविनी! तुम्हारे सभी पुण्यकर्म अचूक हैं और तुम्हारे सभी व्रत सफल होते हैं। 5 1/2॥
 
She said – ‘Kalyani! Panchal princess! Blessed are you who remain present in the service of these five great men, just as Jatila, born in the Gautama dynasty, serves many great sages. Bhavini! All your virtuous deeds are infallible and all your fasting is successful. 5 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)