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mahabharat 12.38.32: वेदों को जानने वाले उन ब्राह्मणों का अन्तःकरण तपस्या के कारण शुद्ध हो गया था। उन महात्माओं ने अपनी ज्ञान दृष्टि से उस राक्षस को पहचान लिया। 32.   |   mahabharat अध्याय 12.38: नगर-प्रवेशके समय पुरवासियों तथा ब्राह्मणोंद्वारा राजा युधिष्ठिरका सत्कार और उनपर आक्षेप करनेवाले चार्वाकका ब्राह्मणोंद्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.38.32 
जज्ञुश्चैव महात्मानस्ततस्तं ज्ञानचक्षुषा।
ब्राह्मणा वेदविद्वांसस्तपोभिर्विमलीकृता:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
वेदों को जानने वाले उन ब्राह्मणों का अन्तःकरण तपस्या के कारण शुद्ध हो गया था। उन महात्माओं ने अपनी ज्ञान दृष्टि से उस राक्षस को पहचान लिया। 32.
 
The conscience of those Brahmins who knew the Vedas had become pure due to penance. Those great souls recognized that demon with their vision of knowledge. 32.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)