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mahabharat 12.38.30: तत्पश्चात राजा युधिष्ठिर बोले, "हे ब्राह्मणो! मैं आपके चरणों में प्रणाम करता हूँ और आपसे विनम्र प्रार्थना करता हूँ कि आप सभी मुझ पर प्रसन्न हों। इस समय मुझ पर चारों ओर से महान विपत्ति आ पड़ी है; अतः आप मुझे शाप न दें।"   |   mahabharat अध्याय 12.38: नगर-प्रवेशके समय पुरवासियों तथा ब्राह्मणोंद्वारा राजा युधिष्ठिरका सत्कार और उनपर आक्षेप करनेवाले चार्वाकका ब्राह्मणोंद्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 38: नगर-प्रवेशके समय पुरवासियों तथा ब्राह्मणोंद्वारा राजा युधिष्ठिरका सत्कार और उनपर आक्षेप करनेवाले चार्वाकका ब्राह्मणोंद्वारा वध  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.38.30 
युधिष्ठिर उवाच
प्रसीदन्तु भवन्तो मे प्रणतस्याभियाचत:।
प्रत्यासन्नव्यसनिनं न मां धिक्कर्तुमर्हथ॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात राजा युधिष्ठिर बोले, "हे ब्राह्मणो! मैं आपके चरणों में प्रणाम करता हूँ और आपसे विनम्र प्रार्थना करता हूँ कि आप सभी मुझ पर प्रसन्न हों। इस समय मुझ पर चारों ओर से महान विपत्ति आ पड़ी है; अतः आप मुझे शाप न दें।"
 
Thereafter King Yudhishthira said, "O Brahmins! I bow down to your feet and humbly pray that you all be pleased with me. At this time, I am facing a great calamity from all sides; therefore, please do not curse me."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)