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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 38: नगर-प्रवेशके समय पुरवासियों तथा ब्राह्मणोंद्वारा राजा युधिष्ठिरका सत्कार और उनपर आक्षेप करनेवाले चार्वाकका ब्राह्मणोंद्वारा वध  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.38.3 
गृहाणि राजमार्गेषु रत्नवन्ति महान्ति च।
प्राकम्पन्तेव भारेण स्त्रीणां पूर्णानि भारत॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे भरतनन्दन! मार्गों के चारों ओर रत्नजटित विशाल भवन स्त्रियों से भरे हुए उनके भारी भार से हिलते हुए प्रतीत हो रहे थे।
 
O Bharatanandan! The huge buildings decorated with gems around the roads seemed to be shaking due to the heavy weight of the women as they were filled with them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)