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mahabharat 12.38.29: प्रजानाथ! इसके बाद वे सभी ब्राह्मण और राजा युधिष्ठिर अत्यंत व्याकुल और लज्जित हो गए। उनके मुँह से विरोध में एक शब्द भी नहीं निकला। वे सब कुछ देर तक मौन रहे।   |   mahabharat अध्याय 12.38: नगर-प्रवेशके समय पुरवासियों तथा ब्राह्मणोंद्वारा राजा युधिष्ठिरका सत्कार और उनपर आक्षेप करनेवाले चार्वाकका ब्राह्मणोंद्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 38: नगर-प्रवेशके समय पुरवासियों तथा ब्राह्मणोंद्वारा राजा युधिष्ठिरका सत्कार और उनपर आक्षेप करनेवाले चार्वाकका ब्राह्मणोंद्वारा वध  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.38.29 
ततस्ते ब्राह्मणा: सर्वे स च राजा युधिष्ठिर:।
व्रीडिता: परमोद्विग्नास्तूष्णीमासन् विशाम्पते॥ २९॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! इसके बाद वे सभी ब्राह्मण और राजा युधिष्ठिर अत्यंत व्याकुल और लज्जित हो गए। उनके मुँह से विरोध में एक शब्द भी नहीं निकला। वे सब कुछ देर तक मौन रहे।
 
Prajanath! After this all those Brahmins and King Yudhishthira became very agitated and ashamed. Not a single word came out of their mouth in protest. They all remained silent for some time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)