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mahabharat 12.38.24-25: राजन! उन सब ब्राह्मणों से घिरा हुआ, जो तपस्या और अनुशासन में तत्पर थे तथा आशीर्वाद देने में तत्पर थे, जिनकी संख्या एक हजार से भी अधिक थी, वह दुष्ट राक्षस महान पाण्डवों का नाश करना चाहता था। उसने उन सब ब्राह्मणों की अनुमति लिए बिना ही राजा युधिष्ठिर से कहा।   |   mahabharat अध्याय 12.38: नगर-प्रवेशके समय पुरवासियों तथा ब्राह्मणोंद्वारा राजा युधिष्ठिरका सत्कार और उनपर आक्षेप करनेवाले चार्वाकका ब्राह्मणोंद्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 38: नगर-प्रवेशके समय पुरवासियों तथा ब्राह्मणोंद्वारा राजा युधिष्ठिरका सत्कार और उनपर आक्षेप करनेवाले चार्वाकका ब्राह्मणोंद्वारा वध  »  श्लोक 24-25
 
 
श्लोक  12.38.24-25 
वृत: सर्वैस्तथा विप्रैराशीर्वादविवक्षुभि:।
पर:सहस्रै राजेन्द्र तपोनियमसंवृतै:॥ २४॥
स दुष्ट: पापमाशंसु: पाण्डवानां महात्मनाम्।
अनामन्त्र्यैव तान् विप्रांस्तमुवाच महीपतिम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
राजन! उन सब ब्राह्मणों से घिरा हुआ, जो तपस्या और अनुशासन में तत्पर थे तथा आशीर्वाद देने में तत्पर थे, जिनकी संख्या एक हजार से भी अधिक थी, वह दुष्ट राक्षस महान पाण्डवों का नाश करना चाहता था। उसने उन सब ब्राह्मणों की अनुमति लिए बिना ही राजा युधिष्ठिर से कहा।
 
King! Surrounded by all those Brahmins, who were engaged in penance and discipline and were eager to give blessings, whose number was more than a thousand, that evil demon wanted to destroy the great Pandavas. He spoke to King Yudhishthira without taking permission from all those Brahmins. 24-25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)