Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.38.23: वह दुर्योधन का मित्र था। उसने अपना असली रूप एक साधु ब्राह्मण के वेश में छिपा रखा था। उसके हाथ में माला और सिर पर शिखा थी। वह त्रिदंड धारण किए हुए था। वह बड़ा ही निर्भीक और निर्भय था॥23॥ | mahabharat अध्याय 12.38: नगर-प्रवेशके समय पुरवासियों तथा ब्राह्मणोंद्वारा राजा युधिष्ठिरका सत्कार और उनपर आक्षेप करनेवाले चार्वाकका ब्राह्मणोंद्वारा वध । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह दुर्योधन का मित्र था। उसने अपना असली रूप एक साधु ब्राह्मण के वेश में छिपा रखा था। उसके हाथ में माला और सिर पर शिखा थी। वह त्रिदंड धारण किए हुए था। वह बड़ा ही निर्भीक और निर्भय था॥23॥
He was a friend of Duryodhan. He had hidden his true identity in the guise of a hermit Brahmin. He had a rosary in his hand and a tuft on his head. He was holding a tridanda. He was very impudent and fearless.॥23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥