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mahabharat 12.38.20: राजन! उस समय वेदों को जानने वाले विद्वान ब्राह्मणों ने हंस के समान हर्षित वाणी से जो अर्थ, शब्द और अक्षर से युक्त वाणी कही थी, वह वहाँ उपस्थित सभी लोगों ने स्पष्ट रूप से सुनी। 20॥   |   mahabharat अध्याय 12.38: नगर-प्रवेशके समय पुरवासियों तथा ब्राह्मणोंद्वारा राजा युधिष्ठिरका सत्कार और उनपर आक्षेप करनेवाले चार्वाकका ब्राह्मणोंद्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 38: नगर-प्रवेशके समय पुरवासियों तथा ब्राह्मणोंद्वारा राजा युधिष्ठिरका सत्कार और उनपर आक्षेप करनेवाले चार्वाकका ब्राह्मणोंद्वारा वध  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.38.20 
हंसवद् विदुषां राजन् द्विजानां तत्र भारती।
शुश्रुवे वेदविदुषां पुष्कलार्थपदाक्षरा॥ २०॥
 
 
अनुवाद
राजन! उस समय वेदों को जानने वाले विद्वान ब्राह्मणों ने हंस के समान हर्षित वाणी से जो अर्थ, शब्द और अक्षर से युक्त वाणी कही थी, वह वहाँ उपस्थित सभी लोगों ने स्पष्ट रूप से सुनी। 20॥
 
Rajan! At that time, the speech full of meanings, words and letters that the learned Brahmins, who had learned the Vedas, had uttered in a joyous voice like a swan, was clearly heard by everyone there. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)