Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.38.16: जिस प्रकार तारों से घिरा हुआ निर्मल चन्द्रमा सुन्दर लगता है, उसी प्रकार राजा युधिष्ठिर उस समय अत्यन्त सुन्दर लग रहे थे, जब वे ब्राह्मणों से घिरे हुए थे, जो उन्हें आशीर्वाद देना चाहते थे। | mahabharat अध्याय 12.38: नगर-प्रवेशके समय पुरवासियों तथा ब्राह्मणोंद्वारा राजा युधिष्ठिरका सत्कार और उनपर आक्षेप करनेवाले चार्वाकका ब्राह्मणोंद्वारा वध । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स संवृतस्तदा विप्रैराशीर्वादविवक्षुभि:।
शुशुभे विमलश्चन्द्रस्तारागणवृतो यथा॥ १६॥
अनुवाद
जिस प्रकार तारों से घिरा हुआ निर्मल चन्द्रमा सुन्दर लगता है, उसी प्रकार राजा युधिष्ठिर उस समय अत्यन्त सुन्दर लग रहे थे, जब वे ब्राह्मणों से घिरे हुए थे, जो उन्हें आशीर्वाद देना चाहते थे।
Just as the clear moon looks beautiful surrounded by stars, similarly King Yudhishthira looked very beautiful at that time when he was surrounded by brahmins who wanted to give him blessings. 16.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥